कुछ साल ज़िन्दगी के

कुछ साल ज़िन्दगी के

पन्नों में जल रहे थे कुछ साल ज़िन्दगी के,
धुआँ धुआँ से हो गये कई ख्याल ज़िन्दगी के ।
एक तेरी याद है बस जो दिल बेहलाती है,
वरना सताते हैं हमे कई सवाल ज़िन्दगी के।
वफ़ा मोहब्बत में, दोस्ती में बेवफ़ाई ,
होते है कई तजूर्बें बेमिसाल ज़िन्दगी के।
हंसते चेहरे जलते पावं,  नदिया चिडियाँ गावं,
हर पल नजर आते हैं कमाल ज़िन्दगी के ।
शाम से सुबह, सुबह से रात का सफ़र,
मालिक हैं हम ऎसी बेहाल ज़िन्दगी के ====================================

बिछुड़ ने की कोई रस्म नहीं होती

तुझ से मिलने की ख़्वाहिश मेरी कभी कम नहीं होती
मेरे हाथों की लकीरों से, मेरी लड़ाई ख़त्म नही होती

यूँ
तो रोशन है दिल का कौना कौना तुझसे ,
कभी तो , के तेरे बीन मेरे घर में रोशनी नहीं होती

तुझे तो मिलना है मुझ से मेरे साथ जीना है ,
ये अलग बात के, खुदा से मेरी जंग ख़त्म नहीं होती ,

यहाँ के दरो-दीवार भी ख़फा रहते है मुझ से ,
ख़ुशबू- -नज़रों की भी शिकायत कम नहीं होती ,

आ मेरे पास कभी यूँ गुन-गुनाता रहूँ तुझ को ,
मेरे ज़ुबान पर तेरी तारीफ़े  , कभी ख़त्म नहीं होती

हम जो मिलेगेना बिछहड़ेगे कभी फिर से ,
मिलने के बाद, बिछुड़ ने की कोई रस्म नहीं होती ,

मैने ये कब कहा के तू मेरी साँसे धड़कन ज़िंदगी है ,
मगर तेरे बिन ये मेरी ज़िंदगी, ज़िंदगी नहीं होती

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ये रचनायें हेम ज्योत्सना जी की हैं मुझे अच्छी लगी तोह मैंने सोचा की आप लोगो से इसे शेयर करते हैं..काफी अच्छा लिखती हैं..

http://hemjyotsana.wordpress.com/

आप भी इनके फेन हो जायेंगे मेरी तरह.. :)

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